
नोएडा की बड़ी - बड़ी इमारतों के बीच खड़ी एक ऊँची, चमकती हुई बिल्डिंग… उसके 21वें फ्लोर पर बने एक लग्ज़री केबिन में एक अजीब सी शांति पसरी हुई थी। जैसे बाहर की भागती दुनिया का यहाँ कोई असर ही नहीं हो।
उस केबिन की चेयर पर एक आदमी बैठा था। उसका सिर कुर्सी के पीछे टिका हुआ… आँखें बंद… उंगलियाँ आपस में जुड़ी हुईं, फिंगर्स क्रॉस… जैसे किसी गहरी सोच को थामे हुए हो। कुर्सी धीरे - धीरे लेफ्ट से राइट… और फिर राइट से लेफ्ट घूम रही थी।



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