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Chapter 37

समर की नज़र उसके खुले सीने पर ठहर गई।  वो बिना एक पल गंवाए झुका और अपने होठ उसकी ब्रेस्ट पर रख दिए।  वो धीरे-धीरे अपने दूसरे हाथ से उसकी दूसरी ब्रेस्ट को सहलाने लगा। उसकी हरकतों में अब एक बेचैनी सी आने लगी थी। उसके होठ उसकी ब्रेस्ट पर रुक - रुक कर दबाव डालते, कभी हल्के से काटते, तो कभी उन्हें अपने बीच लेकर महसूस करने लगते। उसकी इस बढ़ती हुई दीवानगी के बीच मानसी के होंठों से हल्की - हल्की आहें निकलने लगीं, जो माहौल को और भी गहरा बना रही थीं।

अगले ही पल समर उसके ऊपर से उठ कर थोड़ा ऊपर की साइड आके उसकी कमर के इर्द गिर्द पैर करके बैठ गया। मानसी कुछ समझ पाती इससे पहले ही समर ने अपना Dick उसकी ब्रेस्ट के बीचों बीच रखा और उसकी ब्रेस्ट को कसकर अपने हाथों में दबा लिया।

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